दुकान एवं ऑफिस का वास्तु।। Dukan And Office Vastu.
व्यावसायिक स्थान तथा वास्तु शास्त्र का संबंध।। Introduction.
मित्रों, वास्तु शास्त्र में जिस प्रकार निवास-स्थान की दिशा तथा संरचना का विशेष महत्व माना गया है। उसी प्रकार दुकान अथवा ऑफिस जैसे व्यावसायिक स्थान का वास्तु भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है। क्योंकि यहीं से परिवार की आर्थिक उन्नति तथा व्यापारिक सफलता का सीधा संबंध जुड़ा होता है। एक व्यावसायिक स्थान केवल वस्तुओं के लेन-देन का केंद्र मात्र नहीं होता है। बल्कि यह उस स्थान की समग्र ऊर्जा का भी प्रतिबिंब होता है। जो ग्राहकों तथा व्यापारिक संबंधों को आकर्षित अथवा दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।।
दुकान अथवा ऑफिस का संबंध मुख्यतः धन, यश तथा कीर्ति से माना जाता है। इसलिए इसकी दिशा, प्रवेश-द्वार, बैठने की व्यवस्था तथा कैश-काउंटर के स्थान का अत्यंत सूक्ष्मता से निर्धारण किया जाना चाहिए। यदि व्यावसायिक स्थान वास्तु के अनुरूप न हो, तो व्यापार में निरंतर उतार-चढ़ाव, ग्राहकों की कमी अथवा अनावश्यक हानि जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।।
इसके विपरीत यदि दुकान अथवा ऑफिस वास्तु-सम्मत ढंग से निर्मित हो, तो यह व्यापार में निरंतर वृद्धि, ग्राहकों का विश्वास तथा दीर्घकालिक आर्थिक समृद्धि प्रदान करता है। यही कारण है कि प्राचीन वास्तु ग्रंथों में व्यावसायिक स्थानों के निर्माण को भी उतनी ही गंभीरता से लिया गया है। जितना आवासीय भवनों के निर्माण को।
दुकान अथवा ऑफिस के लिए सर्वाधिक शुभ दिशा।। Most Auspicious Direction for Shop and Office.
मित्रों, वास्तु शास्त्र के अनुसार दुकान अथवा ऑफिस के लिए उत्तर, पूर्व अथवा उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान कोण को सर्वाधिक शुभ दिशा माना गया है। उत्तर दिशा स्वयं कुबेर देवता की दिशा है। जो धन तथा समृद्धि के अधिपति माने जाते हैं। इसलिए इस दिशा में मुख्य द्वार अथवा प्रवेश द्वार होने पर व्यापार में धन का प्रवाह निरंतर बना रहता है।।
पूर्व दिशा भी सूर्य देवता की दिशा होने के कारण व्यावसायिक स्थान के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। क्योंकि यह दिशा नई ऊर्जा, नए अवसर तथा नेतृत्व-क्षमता का प्रतीक है। दुकान अथवा ऑफिस का मुख्य द्वार इन्हीं शुभ दिशाओं में रखना सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है। ताकि ग्राहक तथा सकारात्मक ऊर्जा दोनों सहजता से भीतर प्रवेश कर सकें।।
दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा में द्वार होने से पूर्णतः बचना नहीं चाहिए। परन्तु इन दिशाओं में प्रवेश होने पर विशेष वास्तु-उपायों का सहारा लेना आवश्यक हो जाता है। क्योंकि ये दिशाएँ स्थिरता तथा भारीपन की प्रतीक मानी जाती हैं। जो व्यापार की गतिशीलता को कुछ सीमा तक प्रभावित कर सकती हैं।।
दुकान अथवा ऑफिस के मालिक के बैठने की सही दिशा।। Correct Sitting Direction for the Shop or Office Owner.
मित्रों, दुकान अथवा ऑफिस के स्वामी को अपने बैठने की व्यवस्था इस प्रकार करनी चाहिए कि बैठते समय उसका मुख उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर हो। तथा पीठ दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा की ओर स्थिर दीवार का सहारा लिए हुए हो। इस स्थिति में बैठकर कार्य करने से निर्णय-क्षमता, आत्मविश्वास तथा व्यापारिक सूझबूझ में विशेष रूप से वृद्धि होती है, ऐसा वास्तु शास्त्र में माना गया है।।
मालिक की सीट कभी भी मुख्य द्वार के ठीक सामने नहीं होनी चाहिए। तथा उसकी पीठ के पीछे खिड़की अथवा द्वार होने से भी बचना चाहिए। क्योंकि इससे स्थिरता तथा आत्मविश्वास में कमी आ सकती है। स्वामी की सीट के ऊपर किसी प्रकार की बीम अर्थात छत की मोटी पट्टी नहीं होनी चाहिए। क्योंकि इसे मानसिक दबाव तथा तनाव का कारण माना जाता है।।
कर्मचारियों की बैठने की व्यवस्था भी इसी सिद्धांत के अनुसार की जानी चाहिए। अर्थात यथासंभव उनका मुख भी उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। जिससे संपूर्ण कार्यस्थल में सकारात्मक तथा उत्पादक ऊर्जा का संचार बना रहे।।
कैश-काउंटर तथा तिजोरी की सही दिशा।। Correct Direction for Cash Counter and Safe.
मित्रों, दुकान अथवा ऑफिस में कैश-काउंटर अथवा तिजोरी को उत्तर दिशा में रखना सर्वाधिक शुभ माना जाता है। क्योंकि यह दिशा कुबेर देवता की दिशा होती है। तथा यहाँ धन-स्थान होने पर आर्थिक स्थिरता तथा वृद्धि दोनों ही प्राप्त होती हैं। तिजोरी अथवा कैश-बॉक्स का द्वार उत्तर दिशा की ओर खुलना चाहिए। ताकि धन का प्रवाह सदैव सकारात्मक दिशा में बना रहे।।
कैश-काउंटर पर बैठने वाले व्यक्ति का मुख भी उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, तथा यह स्थान मुख्य द्वार से सीधी रेखा में दिखाई न दे, इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तिजोरी को कभी भी शौचालय की दीवार से सटाकर अथवा उसके ठीक ऊपर-नीचे नहीं रखना चाहिए। क्योंकि इससे धन-हानि की संभावना बढ़ जाती है।।
व्यावसायिक स्थान से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण वास्तु नियम।। Other Important Vastu Rules for Commercial Spaces.
मित्रों, दुकान अथवा ऑफिस में भारी सामान, अलमारी अथवा मशीनरी को दक्षिण-पश्चिम दिशा अर्थात नैऋत्य कोण में रखना उचित माना जाता है। क्योंकि यह दिशा स्थायित्व की दिशा है। हल्का तथा प्रदर्शन योग्य सामान उत्तर अथवा पूर्व दिशा में रखना चाहिए। ताकि यह ग्राहकों को सरलता से आकर्षित कर सके।।
व्यावसायिक स्थान में पर्याप्त प्रकाश तथा स्वच्छता होनी चाहिए। तथा प्रवेश-द्वार के आस-पास किसी प्रकार का अवरोध अथवा अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए। क्योंकि इससे ग्राहकों की सहज आवाजाही में बाधा उत्पन्न होती है। मुख्य द्वार पर गणेश जी तथा माँ लक्ष्मी की तस्वीर अथवा स्वस्तिक का चिन्ह अंकित करना भी शुभ माना जाता है।।
और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि व्यापार में केवल वास्तु के नियमों पर ही निर्भर न रहें। बल्कि ईमानदारी, गुणवत्तापूर्ण सेवा तथा ग्राहकों के प्रति सच्चे व्यवहार को भी अपने व्यापार का मूल आधार बनाएं। क्योंकि वास्तु शुभ ऊर्जा तो प्रदान करता है। परन्तु वास्तविक सफलता सदैव सत्य तथा परिश्रम से ही प्राप्त होती है।।
व्यावसायिक वास्तु दोष के निवारण के उपाय।। Remedies for Commercial Vastu Dosha.
मित्रों, यदि किसी कारणवश दुकान अथवा ऑफिस गलत दिशा में बना हो, तो उसे तोड़कर पुनर्निर्माण करने की बजाय कुछ सरल उपायों से भी इसके दोष को काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है। मुख्य द्वार पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर लगाना, नियमित रूप से कपूर जलाना तथा स्वच्छता बनाए रखना दोष-निवारण में विशेष रूप से सहायक माना जाता है।।
व्यापार-स्थल में तुलसी अथवा मनी-प्लांट जैसे शुभ पौधे रखना। तथा प्रतिदिन प्रातःकाल दुकान अथवा ऑफिस खोलते समय संक्षिप्त पूजन करना भी सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है। यदि संभव हो तो उत्तर दिशा की दीवार पर दर्पण लगाना भी धन-वृद्धि के लिए शुभ माना जाता है। क्योंकि इससे धन का प्रतिबिंब दुगुना होने की मान्यता है।।
शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.
मित्रों, मयमतम् तथा विश्वकर्मा वास्तुशास्त्र जैसे प्राचीन ग्रंथों में व्यावसायिक भवनों के निर्माण के लिए उत्तर तथा पूर्व दिशाओं को ही सर्वाधिक शुभ बताया गया है। तथा यह भी स्पष्ट किया गया है कि धन-संबंधी सभी व्यवस्थाएँ कुबेर देवता की दिशा अर्थात उत्तर में ही रखनी चाहिए।।
बृहत्संहिता में भी वराहमिहिर ने व्यापारिक स्थलों के प्रसंग में यह उल्लेख किया है कि द्वार की दिशा तथा बैठने की व्यवस्था का सीधा प्रभाव व्यापार में मिलने वाली सफलता तथा स्थिरता पर पड़ता है। इसलिए इनका निर्धारण अत्यंत सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए।।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)
प्रश्न 1. दुकान अथवा ऑफिस के लिए सबसे शुभ दिशा कौन-सी मानी जाती है।। Which direction is considered most auspicious for a shop or office.
उत्तर:- उत्तर, पूर्व अथवा उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान कोण दुकान अथवा ऑफिस के लिए सर्वाधिक शुभ माना जाता है।।
प्रश्न 2. दुकान अथवा ऑफिस के मालिक को किस दिशा में मुख करके बैठना चाहिए।। In which direction should the shop or office owner sit facing.
उत्तर:- मालिक को उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर मुख करके तथा दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा की दीवार का सहारा लेकर बैठना शुभ माना जाता है।।
प्रश्न 3. कैश-काउंटर अथवा तिजोरी किस दिशा में रखनी चाहिए।। In which direction should the cash counter or safe be placed.
उत्तर:- कैश-काउंटर अथवा तिजोरी को उत्तर दिशा में रखना सर्वाधिक शुभ माना जाता है। तथा इसका द्वार भी उत्तर दिशा की ओर खुलना चाहिए।।
प्रश्न 4. भारी सामान अथवा मशीनरी किस दिशा में रखनी चाहिए।। In which direction should heavy goods or machinery be placed.
उत्तर:- भारी सामान, अलमारी अथवा मशीनरी को दक्षिण-पश्चिम दिशा अर्थात नैऋत्य कोण में रखना उचित माना जाता है।।
प्रश्न 5. यदि दुकान अथवा ऑफिस गलत दिशा में बना हो तो क्या उपाय करना चाहिए।। What remedies should be done if the shop or office is in the wrong direction.
उत्तर:- मुख्य द्वार पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर लगाना। कपूर जलाना, तुलसी अथवा मनी-प्लांट रखना तथा उत्तर दिशा में दर्पण लगाना इस दोष को कम करने में सहायक माना जाता है।।
लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.
मित्रों, दुकान एवं ऑफिस का वास्तु व्यापार की उन्नति, ग्राहकों की वृद्धि तथा आर्थिक समृद्धि से सीधा संबंध रखता है। क्योंकि व्यावसायिक स्थान की ऊर्जा ही अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहकों तथा व्यापारिक संबंधों को आकर्षित करती है। उत्तर-पूर्व दिशा में प्रवेश-द्वार, उत्तर अथवा पूर्व की ओर मुख करके बैठना। तथा कैश-काउंटर एवं भारी सामान का सही स्थान निर्धारण, ये सभी नियम मिलकर व्यापार में स्थिरता तथा वृद्धि का निर्माण करते हैं।।
वैदिक वास्तु परंपरा के अनुसार व्यावसायिक स्थान की योजना अत्यंत सूक्ष्मता तथा सावधानी के साथ बनानी चाहिए। तथा किसी भी वास्तु दोष की स्थिति में सरल उपायों के माध्यम से भी उसे संतुलित किया जा सकता है। इसके साथ ही यह भी स्मरण रखना चाहिए कि वास्तु शुभ ऊर्जा का मार्ग प्रशस्त करता है। परन्तु वास्तविक सफलता ईमानदारी तथा निरंतर परिश्रम से ही प्राप्त होती है।।
परन्तु किसी भी नवीन व्यावसायिक भवन-निर्माण अथवा वर्तमान दुकान-ऑफिस के वास्तु-सुधार से पूर्व किसी योग्य तथा शास्त्र-सम्मत वास्तुविद् अथवा ज्योतिषी से अवश्य परामर्श करना चाहिए। ताकि सही तथा व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।
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