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पूर्व द्वार के लिए सही पद और सही माप।।

पूर्व द्वार के लिए सही पद और सही माप।। East Door Correct Pada Measurement
पूर्व द्वार के लिए सही पद और सही माप।। East Door Correct Pada Measurement

पूर्व द्वार के लिए सही पद और सही माप।। East Door Correct Pada Measurement.

लेख का परिचय।। Introduction.

मित्रों, पिछले लेख में हमने बात की थी कि पूर्वमुखी द्वार शुभ माना जाता है। पर एक बात वहीं अधूरी रह गई थी, कि पूर्व दिशा का हर इंच बराबर शुभ नहीं होता। दोस्तों, एक जैसी पूर्वमुखी दो इमारतें देखिए, एक में बरकत बनी रहती है, दूसरे में पैसा हाथ से फिसलता ही चला जाता है। दोनों का मुख पूर्व, दोनों की दिशा एक, फिर फर्क कहाँ है? फर्क है पद में। यानी द्वार दीवार पर ठीक किस माप पर, किस बिंदु पर लगाया गया है। आज इसी बारीक परंतु अत्यंत महत्वपूर्ण गणित को समझते हैं।।

पद होता क्या है।। What Exactly Is A Pada.

मित्रों, वास्तु शास्त्र में हर भूखंड अथवा भवन को उसके केंद्र बिंदु से 360 अंश के एक पूर्ण वृत्त के रूप में देखा जाता है। इसी 360 अंश को कुल 32 बराबर हिस्सों में बांटा जाता है। और हर हिस्सा लगभग 11.25 अंश का बनता है। इन्हीं 32 हिस्सों को वास्तु पुरुष मंडल का पद कहा जाता है। हर मुख्य दिशा, उत्तर, पूर्व, दक्षिण और पश्चिम, में से हर एक के हिस्से में आठ-आठ पद आते हैं। और द्वार इन्हीं आठ में से किसी एक पद पर बनता है। फिर चाहे भवन कितना भी बड़ा या छोटा क्यों न हो।।

सीधी भाषा में समझें तो दिशा एक बड़ा कमरा है, और पद उस कमरे के भीतर की आठ अलग-अलग सीटें। कमरा सही हो सकता है, पर सीट गलत लग जाए तो पूरा अनुभव ही बदल जाता है। यही गणित द्वार पर भी लागू होता है।।

पद की सही माप कैसे निकाली जाती है।। How The Exact Measurement Of A Pada Is Calculated.

मित्रों, इसके लिए सबसे पहले वास्तु कंपास की सहायता से भवन की ठीक दिशा जानना पड़ता है। इसके बाद भवन के केंद्र बिंदु से एक काल्पनिक वृत्त खींचा जाता है, और उस पूरे 360 अंश को 32 बराबर भागों में बांटा जाता है। प्रत्येक भाग लगभग सवा ग्यारह अंश का। अब जिस दीवार पर द्वार बनना है। उसकी लंबाई को भी इन्हीं अनुपात में बांट दिया जाता है। और आठ बराबर हिस्सों में विभाजित कर दिया जाता है। द्वार जिस हिस्से में पड़ता है, वही उसका पद कहलाता है।।

यहाँ एक बात जान लीजिए, यह माप आँख से अंदाज़ा लगाकर नहीं होती। ज़रा सी चूक पूरे पद को बदल सकती है। और शुभ पद की जगह द्वार अशुभ पद में चला जाता है। इसीलिए किसी अनुभवी वास्तु विशेषज्ञ से यह माप सटीक तरीके से करवाना ही समझदारी है।।

पूर्व दिशा के आठ पद, E1 से E8 तक।। The Eight Padas Of East Direction, E1 To E8.

मित्रों, अब बात करते हैं आज के मुख्य विषय की। पूर्व दिशा में भी बाकी दिशाओं की तरह कुल आठ पद होते हैं। जिन्हें E1 से लेकर E8 तक क्रमांकित किया जाता है। यह क्रम ईशान कोण की तरफ से शुरू होकर आग्नेय कोण की ओर बढ़ता है। इन आठ में से केवल दो पद ही द्वार के लिए वाकई शुभ माने गए हैं। बाकी छह पद किसी न किसी रूप में परेशानी का कारण बन जाते हैं। तो चलिए एक-एक करके इन्हें समझते हैं।।

पहला पद अर्थात E1 यानी शिखी पद ईशान कोण के अत्यंत निकट होता है। और इस पद पर द्वार बनाना आर्थिक हानि, अग्नि भय तथा दुर्घटनाओं का कारक माना जाता है। दूसरा पद अर्थात E2 इस पद पर द्वार रखने से यह फिजूलखर्ची बढ़ाता है। हालांकि इसे कन्या-जन्म का शुभ कारक भी माना गया है। फिर भी धन के अपव्यय के कारण इसे सकारात्मक श्रेणी में नहीं रखा जाता।।

जयंत पद, पूर्व दिशा का सबसे शुभ बिंदु।। Jayant Pada, The Most Auspicious Point Of East.

मित्रों, अब आता है तीसरा पद E3, जिसे वास्तु में “जयंत पद” कहा जाता है। यह पूर्व दिशा का सबसे शुभ पद माना जाता है। इस बिंदु पर द्वार का निर्माण प्रचुर मात्र में आर्थिक संपन्नता, वाद-विवाद में सफलता तथा जीवन में स्थायी उन्नति का कारक बनता है। अगर आपके पास चयन का विकल्प है, तो द्वार को इसी पद के आस-पास रखने की कोशिश आपको करनी चाहिए। कहा जाता है कि इस पद पर द्वार वाले घरों में मुकदमों तथा प्रतिस्पर्धाओं में भी विशेष सफलता मिलती है।।

इंद्र पद, दूसरा उतना ही शक्तिशाली विकल्प।। Indra Pada, An Equally Powerful Second Choice.

मित्रों, जयंत के ठीक बाद आता है चतुर्थ पद अर्थात E4, जिसे “इंद्र पद” के नाम से जाना जाता है। यह भी जयंत पद जितना ही शुभ माना जाता है। और आर्थिक संपन्नता में वृद्धि तथा घर के निवासियों को जीवन में सफलता दिलाने वाला पद है यह। दिलचस्प बात यह है कि पुराने ग्रंथों में इंद्र और राज पद को हमेशा से अत्यंत शुभ तथा यम पद को हानिकारक बताया गया है। और यही परंपरा यहाँ भी सटीक बैठती है। यानी अगर तीसरा E3 न मिले, तो चौथा E4 पर द्वार रखना भी बुद्धिमानी ही कहलाएगा।।

बाकी छह पद क्यों टालने चाहिए।। Why The Other Six Padas Should Be Avoided.

मित्रों, पाँचवा अर्थात E5 यानी “सूर्य पद” का द्वार अनिर्णय की स्थिति, गलत फैसले तथा छोटी बातों पर गुस्सा आने की प्रवृत्ति देता है। छठवाँ अर्थात E6 यानी “सत्य पद” अपने नाम के उलट परिणाम देता है। यहाँ रहने वाले लोग वादों पर टिके नहीं रहते। और यह बेटियों के लिए भी नुकसानदायक माना जाता है। सातवाँ अर्थात E7 यानी “भृश पद” घर वालों को संवेदनहीन तथा दूसरों के प्रति कठोर बना देता है। और आठवाँ अर्थात “E8 पद” से चोरी का भय, आर्थिक हानि तथा दुर्घटनाओं का कारक बनता है।।

इसलिए साफ शब्दों में कहें तो पूर्व दिशा के आठ पदों में से सिर्फ बीच के दो पद, यानी तीसरा जयंत पद और चौथा इंद्र पद, ही द्वार के लिए सुरक्षित माने जाते हैं। बाकी छह पद किसी न किसी रूप में जीवन में अस्थिरता ही लाते हैं। सुख तथा खुशियों से वंचित कर देते हैं। जो की सामान्य रूप से भी अच्छा नहीं होता जिस जगह को भूलकर भी नहीं चुनना चाहिए।।

अगर सही पद पर द्वार ना बन पाए तो क्या करें।। What To Do If The Door Cannot Be Placed On The Right Pada.

मित्रों, अक्सर शहरों में प्लॉट पहले से बने होते हैं। और नए सिरे से द्वार की जगह चुनना संभव नहीं होता। ऐसे में घबराने के बजाय उपाय खोजना ही समझदारी होता है। दहलीज़ की ऊंचाई सही रखना, द्वार के दोनों ओर शुभ चिन्ह अथवा तोरण लगाना, दिशा-अनुसार उचित रंग का चयन करना, तथा द्वार के पास तुलसी अथवा किसी शुभ पौधे को स्थान देना, यह सब मिलकर अशुभ पद के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर सकते हैं। हां, इसके लिए किसी अनुभवी वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है, ताकि उपाय ठीक और असरदार हों।।

निष्कर्ष, दिशा के साथ माप भी उतनी ही ज़रूरी।। Conclusion, Measurement Matters As Much As Direction.

मित्रों, तो अब समझ आ ही गया होगा कि सिर्फ पूर्वमुखी घर होना काफी नहीं है। असली फर्क तो उस बारीक माप में छिपा होता है। जिसे वास्तु पुरुष मंडल का पद कहा जाता है। तीसरा जयंत और चौथा इंद्र, यही दो पद पूर्व दिशा के द्वार को सचमुच शुभ बनाते हैं। बाकी छह पद कोई ना कोई परेशानी लेकर ही आते हैं। दिशा जड़ है, और पद उसकी आत्मा। दोनों साथ मिलें, तभी द्वार वाकई घर के लिए शुभ द्वार कहलाता है।।

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