HomeVastu Articlesगृह कलह का कारण यह वास्तु दोष तो नहीं।।

गृह कलह का कारण यह वास्तु दोष तो नहीं।।

घर में नित्य ही कलह एवं तनाव का कारण घर का यह वास्तु दोष हो सकता है।। Grih Kalah Ka Karan.

मित्रों, कलह एवं तनाव जैसे मेहमान को बाय-बाय बोलिए। घर एक ऐसी जगह होती है जहां हम खुलकर सांस लेना चाहते हैं। इसीलिए इस वास्तु के सहज उपाय को करें और कलह एवं तनाव जैसे मेहमान को बाय-बाय बोलिए। वास्तु शास्त्र के सिद्धांत शास्वत हैं, वो ना गरीब देखता है और ना ही अमीर। वो सभी के घर पर अपना बराबर ही प्रभाव रखता है।।

आप कभी-कभी किसी-किसी के घर पर देखते होंगे, की अक्सर वहां उनमें आपसी तनाव बना रहता है। कहीं-कहीं आप घर के सभी सदस्यों के चेहरे पर स्वाभाविक खुशियाँ नजर आती हैं। ऐसा होने का कारण सिर्फ और सिर्फ उस घर की उर्जा है। जो नकारात्मक और सकारात्मक के रूप में उस घर में निवास करती है। तो मेरे प्यारे मित्रों, मैं आपलोगों को सर्वप्रथम तो ये बताना चाहूँगा, की आप अपने घर को साफ़-सुथरा एवं स्वच्छ रखें ताकि आपके घर में सदैव सकारात्मक उर्जा का प्रवाह बना रहे।।

मित्रों, घर एक ऐसा स्थान होता है, जहां आते ही आनन्द का अनुभव हो एवं शयन कक्ष में जाते ही मीठी-सी नींद पलक झपकते ही आ जाए। जहां कभी पूरे परिवार के साथ हंसी की खिलखिलाहट सुनाई दे तो कभी कोई कोना हमारे एकांत का साथी बनकर सुख प्रदान करे। लेकिन मित्रों, इसी घर में जब कलह और तनाव मेहमान बन जाते हैं तो सारे घर की शांति जैसे कहीं चली जाती है।।

हमें नहीं पता होता है कि ऐसा क्यों होता है? क्यों छोटी-छोटी बातों पर हम अपने ही परिवार से झगड़ बैठते हैं? वास्तु शास्त्र बताता है, कि जाने-अनजाने घर के निर्माण में कुछ दोष रह जाते हैं अथवा कहीं न कहीं कोई न कोई दोष है और ये सब उसी का परिणाम होता है। तो आइये आज फिर से कुछ और आसान से वास्तु टिप्स बताते हैं, जो आपके घर को सुख, शांति और खुशियों की ठंडी छांव प्रदान कर सकती है।।

आपको चाहिए कि आपके घर के सभी दरवाजों के कब्जों में समय-समय पर तेल डालते रहें अन्यथा दरवाजा खोलते या बंद करते समय आवाज करने लगते हैं। ऐसे दरवाजे वास्तु के सिद्धान्तों के अनुसार अत्यंत ही अशुभ तथा अनिष्टकारी माना गया है। अपने घर में विद्युत संबंधी उपकरण जो कर्कश ध्वनि उत्पन्न करते हों जैसे पंखे, कूलर आदि की समय-समय पर रिपेयरिंग करवाते रहें। घर में कम से कम वर्ष में दो बार पूजा-पाठ, हवन-यज्ञादि अवश्य करवाएं। अगर भवन में जल प्रवाह ठीक न हो या पानी की सप्लाई सही तरीके या सही दिशा में न हो तो उत्तर-पूर्व दिशा अर्थात् ईशान कोण से भूमिगत जल की टंकी का निर्माण कर उसी से भवन में जल की सप्लाई करें।।

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