किस राशि “लग्न” की कुण्डली में कौन सा ग्रह जातक को राजा-महाराजाओं के समान ऐश्वर्य देता है।। Lagna Anusar Kaun Grah Rajyog Deta Hai.
हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,
मित्रों, मैंने राजयोगों के हर एक पहलू पर पाराशरी एवं अन्य ज्योतिष के ग्रन्थों के आधार पर लेख लिखे हैं । सामान्यतया थोडा-बहुत भी ज्योतिष का जानकार व्यक्ति इस बात को भली-भाँती जानता है, कि जन्मकुण्डली में नौवें और दसवें स्थान का क्या महत्त्व होता है । जन्मकुण्डली में नौवां स्थान भाग्य का और दसवां कर्म का स्थान होता है । कोई भी व्यक्ति इन दोनों घरों की वजह से ही सबसे ज्यादा सुख और समृधि प्राप्त कर सकता है ।।
जग विख्यात बात एवं संसार का अकाट्य सिद्धान्त है, कि कर्म से ही भाग्य का निर्माण होता है । आज का अच्छा कर्म कल का सद्भाग्य तथा आज का बुरा कर्म ही कल का दुर्भाग्य बनकर सामने आता है । साथ ही सच ये भी है, कि भाग्यवान व्यक्ति ही अच्छे कार्य भी करता है । अगर जन्मकुण्डली के नौवें या दसवें घर में कारक एवं बलवान ग्रह मौजूद हो तो उस जातक के जीवन में राजयोग का निर्माण करते ही हैं ।।
राज योग प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से राजा के समान सुख प्रदान करता है ।
मित्रों, राज योग एक ऐसा योग होता है, जो प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से राजा के समान सुख प्रदान करता है । इस योग को प्राप्त करने वाला व्यक्ति सभी प्रकार की सुख-सुविधाओं से युक्त होता है । ज्योतिष की दुनिया में जिन व्यक्तियों की कुण्डली में राजयोग निर्मित होता है, वे उच्च स्तरीय राजनेता, मंत्री, किसी राजनीतिक दल के प्रमुख अथवा किसी कला एवं किसी व्यवसाय में खूब मान-सम्मान प्राप्त करते हैं ।।
राजयोग का आंकलन करने के लिए जन्मकुण्डली में लग्न को आधार बनाया जाता है । कुण्डली की लग्न में अच्छे ग्रह हों तो वो भी जातक को राजयोग प्रदान करते हैं । जिस व्यक्ति की कुण्डली में राजयोग रहता है उस व्यक्ति को हर प्रकार की सुख-सुविधा और लाभ भी प्राप्त होते हैं । इस लेख के माघ्यम से आइए जानें कि कुण्डली में राजयोग का निर्माण कैसे होता है ।।
मेष एवं वृष लग्न की कुण्डली में राजयोग।।
मित्रों, मेष लग्न की कुण्डली में मंगल और बृहस्पति अगर नौवें या दसवें भाव में विराजमान हों तो इनकी युति राजयोग का निर्माण करती है । वृष लग्न की कुण्डली में शुक्र और शनि अगर नौवें या दसवें स्थान पर विराजमान हो तो यह राजयोग का निर्माण करते हैं । वृष लग्न में शनि अकेला राजयोग बनाता है तथा राजयोग के लिए प्रधान कारक बताया गया है ।।
मिथुन एवं कर्क लग्न की कुण्डली में राजयोग।।
मिथुन लग्न की कुण्डली में अगर बुध या शनि नौवें या दसवें घर में एक साथ बैठें तो ऐसी कुण्डली वाले जातक का जीवन राजाओं जैसा बन जाता है । कर्क लग्न की कुण्डली में अगर चन्द्रमा और बृहस्पति भाग्य या कर्म के स्थान पर मौजूद होते हैं तो यह केंद्र त्रिकोण राज योग बना देते हैं । इस लग्न वालों के लिए बृहस्पति और चन्द्रमा बेहद शुभ ग्रह भी बताये गये हैं ।।
सिंह, कन्या एवं तुला लग्न की कुण्डली में राजयोग।।
मित्रों, सिंह लग्न की कुण्डली वाले के जातकों के लिए अगर सूर्य और मंगल दसम या भाग्य स्थान में बैठें तो जातक के जीवन में राज योग कारक का निर्माण हो जाता है । कन्या लग्न की कुण्डली में बुध और शुक्र अगर भाग्य स्थान या दसम भाव में एक साथ आ जाते हैं तो जातक का जीवन राजाओं जैसा हो जाता है । तुला लग्न वालों का भी शुक्र या बुध अगर कुण्डली के नौवें या दसवें स्थान में एक साथ बैठे हों तो इस ग्रहों का शुभ प्रभाव जातक को राजयोग के रूप में मिलता है ।।
वृश्चिक एवं धनु लग्न की कुण्डली में राजयोग।।
वृश्चिक लग्न की कुण्डली में सूर्य और मंगल भाग्य स्थान या कर्म स्थान अर्थात नौवें या दसवें भाव में एक साथ बैठें तो ऐसी कुण्डली वाले जातक का जीवन राजाओं जैसा होता है । यहाँ एक बात और ध्यान देने वाली है कि अगर मंगल और चंद्रमा भी भाग्य या कर्म स्थान में हों तो यह शुभ फलदायी होते हैं । धनु लग्न की कुण्डली वाले जातकों के लिए राजयोग के कारक बृहस्पति और सूर्य माने जाते हैं । यह दोनों ग्रह अगर नौवें या दसवें घर में एक साथ बैठ जायें तो यह राजयोग बनाते हैं ।।
मकर, कुम्भ एवं मीन लग्न की कुण्डली में राजयोग।।
मित्रों, मकर लग्न वाले कुण्डली में अगर शनि और बुध की युति, भाग्य या कर्म स्थान में हो तो राजयोग बन जाता है । कुम्भ लग्न वालों का अगर शुक्र और शनि नौवें या दसवें स्थान में एक साथ बैठें तो जातक का जीवन राजाओं जैसा होता है । मीन लग्न की कुण्डली वालों का अगर बृहस्पति और मंगल जन्म कुण्डली के नवम या दसम स्थान में एक साथ बैठें तो यह राज योग बना देते हैं ।।
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