HomeVastu Articlesलिफ्ट किस दिशा में होनी चाहिए।।

लिफ्ट किस दिशा में होनी चाहिए।।

लिफ्ट किस दिशा में होनी चाहिए।। Lift Kis Disha Me Hona Chahiye.

लेख का परिचय।। Introduction.

मित्रों, आजकल के मल्टी-स्टोरी फ्लैट्स और बड़े बंगलों में लिफ्ट लगवाना अब कोई विलासिता नहीं रह गई है। अब आज के समय में यह ज़रूरत बन चुकी है। पर लोग जब लिफ्ट लगवाते हैं, तो उसकी टेक्नोलॉजी, उसकी स्पीड, उसका डिज़ाइन तो देखते हैं। दिशा किसी के ध्यान में ही नहीं आती। जबकि वास्तु शास्त्र की नज़र से देखें तो लिफ्ट कोई मामूली चीज़ नहीं। यह एक भारी, चलती हुई तथा लगातार ऊपर-नीचे होने वाली संरचना है। जो घर की ऊर्जा को सीधा प्रभावित करती है। तो चलिए आज इसी विषय को विस्तार से समझते हैं।।

लिफ्ट को वास्तु में सीढ़ी जैसा क्यों माना जाता है।। Why Is Lift Treated Like A Staircase In Vastu.

मित्रों, वास्तु शास्त्र में लिफ्ट को सीढ़ी की ही श्रेणी में रखा जाता है। क्योंकि दोनों का काम एक ही होता है। एक तल से दूसरे तल तक ले जाना। पर लिफ्ट की एक खासियत है जो इसे सीढ़ी से भी भारी बना देती है। सीढ़ी सिर्फ एक बार बनती है और स्थिर रहती है। जबकि लिफ्ट की शाफ्ट यानी वह खोखला स्तंभ, भवन की नींव से लेकर सबसे ऊपरी मंज़िल तक निरंतर एक सीधी रेखा में चलता रहता है।।

उसके भीतर उसका केबिन लगातार गति करता रहता है। इसीलिए इसकी बाउंड्री वॉल की ऊंचाई भी सीढ़ी के लिए बनाई गई मुंडेर से भी ज़्यादा रखी जाती है। और यही भारीपन इसे वास्तु की दृष्टि से एक अत्यंत संवेदनशील तत्व बना देता है।।

लिफ्ट के लिए सबसे उपयुक्त दिशा।। The Most Suitable Direction For A Lift.

मित्रों, चूंकि लिफ्ट एक भारी तथा ऊंची संरचना होती है। इसलिए इसे घर के उस हिस्से में रखा जाना चाहिए, जिसे वास्तु शास्त्र में पहले से ही भारी दिशा माना गया है। यही कारण है कि नैऋत्य कोण अर्थात दक्षिण-पश्चिम दिशा को लिफ्ट के लिए सर्वाधिक उपयुक्त बताया जाता है। इसके बाद दक्षिण दिशा तथा पश्चिम दिशा को भी लिफ्ट के लिए स्वीकार्य माना जाता है। इसके पीछे तर्क बिलकुल सीधा है। भवन का सबसे भारी तथा सबसे ऊंचा हिस्सा हमेशा नैऋत्य कोण में ही होना चाहिए। और लिफ्ट जैसी भारी संरचना इसी सिद्धांत के पूरी तरह अनुरूप बैठती है।।

किन दिशाओं में लिफ्ट लगाने से बचना चाहिए।। Which Directions Should Be Avoided For The Lift.

मित्रों, अगर नैऋत्य, दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा में लिफ्ट लगाना उचित है। तो इसके ठीक उलट ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा में लिफ्ट लगाना सबसे बड़ी वास्तु भूल मानी जाती है। ईशान कोण को देवताओं की दिशा तथा सबसे हल्की और पवित्र दिशा माना गया है। और वहाँ इतनी भारी संरचना का होना उस दिशा की स्वाभाविक हल्की ऊर्जा को पूरी तरह दबा देता है।।

इसी कारण ईशान कोण में लिफ्ट होने पर घर में आर्थिक अस्थिरता, स्वास्थ्य समस्याएँ तथा मानसिक तनाव जैसी परेशानियाँ देखी जाती हैं। उत्तर तथा पूर्व दिशा में भी लिफ्ट लगाने से यथासंभव बचना चाहिए। क्योंकि यह दोनों भी अपेक्षाकृत हल्की तथा शुभ दिशाएं मानी जाती हैं।।

भवन के मध्य भाग यानी ब्रह्मस्थान में भी लिफ्ट कभी नहीं लगानी चाहिए। यह वह केंद्रीय स्थान है, जिसे भवन की आत्मा कहा जाता है। और यहाँ किसी भी प्रकार का भारी निर्माण अथवा निरंतर हलचल वाली संरचना रखना वास्तु शास्त्र में पूर्णतः वर्जित बताया गया है।।

लिफ्ट का दरवाज़ा किस दिशा में खुले।। Which Direction Should The Lift Door Face.

मित्रों, केवल लिफ्ट का स्थान ही नहीं, बल्कि उसके दरवाज़े की दिशा भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। सामान्यतः लिफ्ट का दरवाज़ा उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर खुलना शुभ माना जाता है। भले ही लिफ्ट स्वयं नैऋत्य कोण में क्यों न स्थित हो। इससे यह संतुलन बन जाता है कि भारी संरचना तो भारी दिशा में है। पर उसमें आने-जाने का द्वार हल्की तथा शुभ दिशा की ओर खुल रहा है। जिससे नकारात्मकता का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है।।

लिफ्ट के भीतर तथा आसपास ध्यान रखने योग्य बातें।। Points To Keep In Mind Inside And Around The Lift.

मित्रों, लिफ्ट के भीतर तथा उसके प्रतीक्षा क्षेत्र में भी कुछ छोटी परंतु महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए। लिफ्ट का प्रकाश हमेशा पर्याप्त तथा उजला होना चाहिए। धुंधली अथवा टिमटिमाती रोशनी को अशुभ माना जाता है। लिफ्ट तथा उसके आस-पास का क्षेत्र सदैव स्वच्छ रहना चाहिए। वहाँ कबाड़ अथवा अनावश्यक वस्तुएं जमा नहीं होनी चाहिए।।

लिफ्ट के दर्पण को भी साफ-सुथरा तथा बिना दरार वाला रखना चाहिए। क्योंकि टूटा हुआ दर्पण नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। लिफ्ट का रंग हल्का, सौम्य तथा शांतिदायक रखना चाहिए। जैसे हल्का सफेद, क्रीम अथवा हल्का भूरा। अत्यधिक गहरे अथवा भड़कीले रंगों से यहाँ बचना चाहिए। क्योंकि लिफ्ट जैसी संकरी तथा गतिशील जगह में गहरे रंग मानसिक बेचैनी बढ़ाने वाले माने जाते हैं।।

लिफ्ट के वास्तु दोष के सामान्य उपाय।। General Remedies For Lift Vastu Dosha.

मित्रों, अगर परिस्थितिवश लिफ्ट पहले से ही किसी अनुपयुक्त दिशा में लग चुकी हो, और उसे बदलना संभव न हो, तो घबराने की बजाय कुछ सरल उपायों से इसके प्रभाव को संतुलित किया जा सकता है। लिफ्ट के पास हल्के रंग की पेंटिंग अथवा सकारात्मक दृश्य लगाना। वहाँ पर्याप्त रोशनी सुनिश्चित करना, तथा नियमित रूप से वहाँ कपूर अथवा धूप जलाना पारंपरिक रूप से लाभकारी उपाय माने जाते हैं।।

लिफ्ट के प्रवेश द्वार के पास एक छोटा सा पौधा अथवा शुभ चिन्ह लगाना भी नकारात्मक ऊर्जा को संतुलित करने में सहायक बताया जाता है। इसके अतिरिक्त वास्तु पिरामिड अथवा वास्तु यंत्र की स्थापना भी इस दिशा में एक प्रचलित तथा प्रभावी उपाय मानी जाती है।।

निष्कर्ष, ऊंचाई का संतुलन ही असली वास्तु है।। Conclusion, Balancing Height Is The Real Essence Of Vastu.

मित्रों, तो अब समझ आ ही गया होगा कि लिफ्ट भी घर की उतनी ही महत्वपूर्ण संरचना है, जितनी सीढ़ी अथवा मुख्य द्वार। नैऋत्य कोण अथवा दक्षिण-पश्चिम दिशा इसके लिए सर्वाधिक उपयुक्त मानी जाती है। जबकि ईशान कोण तथा भवन के केंद्र से इसे सदैव दूर रखना चाहिए।।

भारी संरचना को भारी दिशा में, और द्वार को हल्की दिशा की ओर खुलने दें। यही इस पूरे विषय का सार है। सही दिशा में लगी लिफ्ट ना सिर्फ सुविधा देती है। बल्कि घर की समग्र ऊर्जा को भी संतुलित बनाए रखती है।।

#लिफ्ट_किस_दिशा_में_हो #लिफ्ट_का_वास्तु #घर_की_लिफ्ट_की_सही_दिशा #लिफ्ट_वास्तु_दोष_उपाय #नैऋत्य_दिशा_लिफ्ट #Lift_Direction_Vastu #Correct_Lift_Direction_Tips #Lift_Vastu_Dosha_Remedies #Elevator_Vastu_Tips #Vastu_Tips_For_Lift

ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे  YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Channel.

इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।

किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं ।।
 
संपर्क करें:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा ।।
 
WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
E-Mail :: balajijyotish11@gmail.com
Balaji Jyotish Kendra
Balaji Jyotish Kendrahttp://balajijyotish.com
Balaji Jyotish Kendra par Vedic Astrology, Kundli Analysis, Horoscope Reading aur Astro Remedies step-by-step. Online astrology classes, practical training aur expert guidance ke saath apni jyotish knowledge ko professional level tak Pahuchaye. Contact Us.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments