मुख्य द्वार किस दिशा में होना चाहिए।। Main Door Direction-Vastu.
लेख का परिचय।। Introduction.
मित्रों, ज़रा सोचिए — घर वही, फर्नीचर वही, बजट भी वही, फिर भी एक घर में घुसते ही पॉज़िटिव एनर्जी महसूस होती है। और दूसरे में जाते ही अजीब सा भारीपन लगता है। लोग कहते हैं वाइब्स, वास्तुशास्त्री कहते हैं मुख्य द्वार की दिशा। क्योंकि दोस्तों, मुख्य द्वार सिर्फ लकड़ी और कब्ज़े का दरवाज़ा नहीं होता। यह वह गेटवे है जहाँ से घर में ऊर्जा, समृद्धि और सौभाग्य प्रवेश करते हैं। या फिर बाहर ही रुक जाते हैं। चलिए आज बिना बोरियत के, दिशा-दर-दिशा समझते हैं कि आपके घर का मेन गेट किस ओर होना चाहिए, किस ओर बिलकुल नहीं, और क्यों।।
दिशा इतनी बड़ी बात क्यों है।। Why Direction Matters So Much.
मित्रों, वास्तु शास्त्र के अनुसार पृथ्वी पर पाँच तत्व, जल, अग्नि, वायु, पृथ्वी और आकाश, हर दिशा में अलग-अलग अनुपात में सक्रिय रहते हैं। सूर्य पूर्व से उगता है। इसलिए पूर्व दिशा को ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक माना गया है। उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा कहा गया है। मुख्य द्वार जिस दिशा में खुलता है, उसी दिशा की ऊर्जा सबसे पहले घर में प्रवेश करती है। इसलिए यह चुनाव बस ऐसे ही नहीं होना चाहिए, अपितु सोच-समझकर रखना चाहिए।।
पूर्व दिशा, नई शुरुआत वाला गेट।। East Direction, The Gate of New Beginnings.
मित्रों, पूर्वमुखी मुख्य द्वार को सबसे शुभ दिशाओं में गिना जाता है। यह दिशा सूर्यदेव की दिशा है। जहाँ से रोज़ सुबह ताज़ी ऊर्जा, सकारात्मकता और नई संभावनाएँ घर में दाखिल होती हैं। इस दिशा का द्वार वाले घरों में रहने वाले लोग स्वाभाविक रूप से ज़्यादा उत्साही, आत्मविश्वासी और तरक्की की ओर बढ़ने वाले माने जाते हैं। बस ध्यान रहे, पूर्व दिशा में द्वार का सही पद यानी वास्तु पुरुष मंडल का सही हिस्सा होना ज़रूरी है। हर पूर्वमुखी द्वार बराबर शुभ नहीं होता।।
उत्तर दिशा, कुबेर वाला गेट।। North Direction, The Gate of Kubera.
मित्रों, अगर आपका सपना है कि पैसा घर में आए और टिके भी, तो उत्तर दिशा का मुख्य द्वार आपके लिए है। यह दिशा सीधे कुबेर देवता से जुड़ी है, धन, समृद्धि और व्यापार में उन्नति का प्रतीक होता है यह। व्यापारी वर्ग और बिज़नेस चलाने वालों के लिए यह दिशा विशेष रूप से शुभ मानी गई है। इस दिशा में द्वार होने पर घर में आर्थिक स्थिरता बनी रहती है। और अनायास धन-प्राप्ति के योग भी बनते हैं।।
ईशान कोण, सबसे प्रीमियम गेट।। Ishan Kon, The Most Premium Gate.
मित्रों, अगर वास्तु में कोई प्रीमियम सीट है, तो वह है ईशान कोण। यानी उत्तर और पूर्व के बीच का कोण। इसे देवताओं की दिशा माना गया है। और यहाँ का द्वार पूरे घर में सबसे ज़्यादा पॉज़िटिव माना जाता है। इस दिशा से मुख्य द्वार होने पर घर में शांति, आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक स्पष्टता बनी रहती है। यानी सिर्फ पैसा नहीं, सुकून भी साथ आता है। जो आजकल किसी लॉटरी से कम नहीं।।
जिन दिशाओं से सतर्क रहना चाहिए।। Directions You Should Be Cautious About.
दक्षिण दिशा को यम की दिशा भी कहा जाता है। सीधा दक्षिणमुखी द्वार आमतौर पर वास्तु में बहुत ही अशुभ माना जाता है। क्योंकि यह ऊर्जा-प्रवाह को असंतुलित करता है। हालांकि यह पूरी तरह वर्जित नहीं है, सही वास्तु उपायों जैसे तुलसी का पौधा, सही रंग, सही ऊँचाई के साथ इसे संतुलित किया जा सकता है। परन्तु बिना समझे यह दिशा चुनना जोखिम भरा होता है। दक्षिण-पश्चिम अर्थात नैऋत्य कोण को सबसे भारी और अशुभ दिशा माना जाता है। यहाँ का द्वार अक्सर घर में तनाव, कर्ज़ और अस्थिरता लाने वाला माना गया है। अगर आपके पास विकल्प है, तो इस दिशा से बचना ही समझदारी है।।
हर किसी को शुभ दिशा नहीं मिलती, तो क्या करें।। What If You Don’t Get an Ideal Direction.
मित्रों, हर किसी को पूर्वमुखी या उत्तरमुखी घर मिल जाए, यह ज़रूरी नहीं, ख़ासकर शहरों में जहाँ प्लॉट की दिशा पहले से तय होती है। ऐसे में घबराने की ज़रूरत नहीं। वास्तु शास्त्र में हर दोष का एक उपाय भी बताया गया है। सही कलर, सही मुख्य द्वार का डिज़ाइन, दहलीज़ की ऊंचाई, तोरण, और दिशा-अनुसार देवी-देवता के चित्र लगाकर अशुभ प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है।।
मुख्य द्वार से जुड़े ज़रूरी नियम जो अक्सर लोग भूल जाते हैं।। Important Main Door Rules People Often Forget.
मित्रों, मुख्य द्वार घर के बाकी दरवाज़ों से बड़ा एवं भव्य होना चाहिए। यह घर का मुख्य द्वार होता है। इसे सबसे प्रमुख दिखना चाहिए। द्वार खोलते समय आवाज़ नहीं आनी चाहिए। चरमराता हुआ दरवाज़ा नकारात्मक ऊर्जा का संकेत माना जाता है। मुख्य द्वार के ठीक सामने सीढ़ियाँ, टॉयलेट अथवा लिफ्ट नहीं होनी चाहिए। यह सीधे घर में आने वाली ऊर्जा को वापस बाहर का मार्ग दिखा देता है। द्वार के दोनों ओर पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। अंधेरा मुख्य द्वार समृद्धि के मार्ग में रुकावट माना जाता है।।
निष्कर्ष, दिशा से बड़ी नीयत होती है।। Conclusion, Intention Matters More Than Direction.
मित्रों, याद रखिए, वास्तु शास्त्र दिशाओं का विज्ञान है। अंधविश्वास नहीं। सही दिशा घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को आसान बनाती है। पर अंततः घर की खुशहाली परिवार के प्रेम, मेहनत और आपसी सामंजस्य पर ही टिकी होती है। दिशा दरवाज़ा खोल सकती है, घर में खुशियाँ भरना आपके हाथ में होता है।।
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