राहु का कुण्डली में विशेष प्रभाव और योग।। Rahu Ka Vishesh Yoga Aur Prabhav.
हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,
मित्रों, आज हम नवग्रहों में से एक अत्यन्त रहस्यमय और शक्तिशाली ग्रह — राहु के विशेष योग और प्रभाव के विषय में बात करेंगे। राहु एक छाया ग्रह है जिसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है परन्तु इसका प्रभाव सभी ग्रहों में सबसे अधिक तीव्र और अप्रत्याशित होता है।।
मित्रों, राहु की प्रकृति को समझना सबसे पहले आवश्यक है। राहु भ्रम, माया, अचानक परिवर्तन, विदेश, तकनीक, राजनीति, जादू-टोना और अपारम्परिक मार्गों का कारक है। राहु जिस भाव में बैठता है उस भाव के विषयों को वह अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करता है।।
राहु का सबसे प्रसिद्ध और शुभ योग है — “राहु-गुरु की युति” अर्थात् गुरु चाण्डाल योग। मित्रों, यह नाम सुनकर घबराइये नहीं। इस योग को अशुभ कहा जाता है परन्तु यह योग यदि शुभ भावों में हो तो जातक को असाधारण ज्ञान, विदेशी शिक्षा और आध्यात्मिक गहराई देता है। ऐसे जातक पारम्परिक सोच से परे हटकर नई राह बनाते हैं।।
दूसरा महत्वपूर्ण योग है — “राहु का लग्न में होना।” जब राहु लग्न में होता है तो जातक का व्यक्तित्व अत्यन्त चुम्बकीय और रहस्यमय होता है। ऐसे जातक दूसरों पर सम्मोहन जैसा प्रभाव डालते हैं। राजनीति और मीडिया में ऐसे जातकों की धूम होती है परन्तु इनके जीवन में उतार-चढ़ाव भी खूब आते हैं।।
मित्रों, राहु का दशम भाव में होना एक अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थिति है। दशम भाव में राहु जातक को अपने क्षेत्र में अचानक और अप्रत्याशित सफलता दिलाता है। ऐसे जातक अपने कार्यक्षेत्र में नए-नए प्रयोग करते हैं और अक्सर सफल भी होते हैं। राजनीति, फिल्म, तकनीक और मीडिया में राहु दशम का जातक शीर्ष पर पहुँचता है।।
राहु जब शनि के साथ युति करता है तो “शनि-राहु योग” बनता है जो अत्यन्त कर्मकारक योग है। ऐसे जातक जीवन में कठोर परिश्रम करते हैं परन्तु फल देर से मिलता है। इस योग वाले जातकों को जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है परन्तु अन्त में सफलता अवश्य मिलती है।।
मित्रों, राहु की महादशा अठारह वर्षों की होती है। इस दशा में जातक के जीवन में अचानक बड़े परिवर्तन आते हैं। यदि राहु शुभ भाव में और शुभ ग्रहों के साथ हो तो यह दशा जीवन की सर्वश्रेष्ठ दशा सिद्ध होती है। परन्तु यदि राहु पीड़ित हो तो इस दशा में जातक को अत्यधिक कष्ट झेलने पड़ सकते हैं।।
राहु के उपाय के रूप में प्रतिदिन “ॐ रां राहवे नमः” मन्त्र का जाप करें। शनिवार को नारियल बहते जल में प्रवाहित करें। सरसों और काले तिल का दान करें। गणेश जी की उपासना भी राहु को शान्त करने में अत्यन्त प्रभावकारी है।।
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