HomeVastu Articlesदिशा सही ना हो तो मुख्य द्वार पर कौन सा रंग करें।।

दिशा सही ना हो तो मुख्य द्वार पर कौन सा रंग करें।।

दिशा सही ना हो तो मुख्य द्वार पर कौन सा रंग करें।। Vastu Colors For Main Door.

लेख का परिचय।। Introduction.

मित्रों, अक्सर लोग पूछते हैं, स्वामी जी हमारा फ्लैट तो पहले से बना बनाया मिला है। दिशा भी वैसी नहीं जैसी वास्तु में शुभ बताई जाती है। अब क्या तोड़-फोड़ करवाएं। जी नहीं, हर बार तोड़-फोड़ ज़रूरी नहीं। वास्तु शास्त्र में दिशा के साथ-साथ रंग भी उतना ही शक्तिशाली उपाय माना गया है।।

हर दिशा पंचतत्वों में से किसी न किसी एक पंचतत्व से जुड़ी होती है। और हर तत्व का अपना एक रंग (Color) होता है। सही रंग उस दिशा की ऊर्जा के साथ तालमेल बिठा देता है। और गलत दिशा का भारीपन भी काफी हद तक हल्का पड़ जाता है। चलिए दिशा-दर-दिशा समझते हैं, इस विषय को।।

रंग (Color) और तत्व का यह गणित कैसे काम करता है।। How Does This Element-Color Equation Work.

मित्रों, वास्तु शास्त्र पांच तत्वों पर टिका विज्ञान है। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। हर दिशा में इनमें से कोई एक तत्व प्रधान रूप से सक्रिय रहता है। जब मुख्य द्वार किसी अपेक्षाकृत भारी अथवा चुनौतीपूर्ण दिशा में बन ही गया हो, तब वहाँ ऐसा रंग लगाया जाता है जो उस दिशा के तत्व के साथ मेल खाए। ना कि उससे टकराए। यही सोच पूरे रंग-चयन के पीछे काम करती है। इसे विरोध नहीं, सामंजस्य बिठाना कहते हैं।।

दक्षिण दिशा का द्वार, अग्नि तत्व के रंग अपनाएं।। South Facing Door, Choose Fire Element Colors.

मित्रों, दक्षिण दिशा को यम की दिशा तथा अग्नि तत्व की दिशा माना गया है। अब अगर मानलीजिये की आपका मुख्य द्वार यहाँ ही बन चुका है। तो नीला अथवा काला रंग बिलकुल ना लगाएं। यह अग्नि तत्व से सीधा टकराव पैदा करता है। इसके बजाय लाल, नारंगी अथवा भूरे रंग के शेड्स को प्राथमिकता दें। यह रंग अग्नि तत्व के अनुरूप होकर द्वार की ऊर्जा को संतुलित बनाए रखते हैं। और दक्षिणमुखी द्वार के भारीपन को भी काफी हद तक हल्का कर देते हैं।।

नैऋत्य कोण का द्वार, पृथ्वी तत्व के रंग अपनाएं।। Southwest Facing Door, Choose Earth Element Colors.

मित्रों, नैऋत्य कोण अर्थात दक्षिण-पश्चिम दिशा को वास्तु शास्त्र में सबसे भारी तथा सबसे संवेदनशील दिशा माना गया है। और यहाँ मुख्य द्वार का होना वैसे भी आदर्श नहीं माना जाता है। फिर भी अगर परिस्थितिवश द्वार यहीं बना हो, तो पीला, मटमैला, क्रीम अथवा हल्का भूरा रंग सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है। यह पृथ्वी तत्व से जुड़े रंग हैं, और इस दिशा को स्थिरता तथा भारीपन देने में सहायक सिद्ध होते हैं। चटक अथवा भड़कीले रंगों से यहाँ बचना चाहिए।।

आग्नेय कोण का द्वार, संतुलित अग्नि रंग अपनाएं।। Southeast Facing Door, Choose Balanced Fire Tones.

मित्रों, आग्नेय कोण अर्थात दक्षिण-पूर्व दिशा भी अग्नि तत्व की ही दिशा मानी जाती है। परंतु यहाँ की अग्नि पूर्व की सौम्यता के साथ मिश्रित होती है। इसलिए यहाँ गहरे लाल अथवा उग्र नारंगी रंग की अपेक्षा हल्का गुलाबी, हल्का नारंगी अथवा हल्का भूरा रंग अधिक संतुलित माना जाता है। यह रंग अग्नि तत्व को शांत करते हुए भी उसकी ऊर्जा को बनाए रखते हैं। जिससे द्वार पर एक सौम्य परंतु सक्रिय ऊर्जा बनी रहती है।।

पश्चिम दिशा का द्वार, जल तत्व के रंग अपनाएं।। West Facing Door, Choose Water Element Colors.

मित्रों, पश्चिम दिशा को जल तत्व का दिशा माना गया है। और इसे सामान्य फल देने वाली दिशा कहा जाता है। बहुत अशुभ नहीं परंतु उत्तर-पूर्व जितनी शुभ भी नहीं। यहाँ सफेद अथवा हल्के ग्रे रंग का चुनाव सर्वाधिक उपयुक्त होता है। यह रंग जल तत्व की शीतलता तथा स्थिरता को प्रतिबिंबित करते हैं। और द्वार पर एक शांत तथा संतुलित ऊर्जा बनाए रखते हैं। हल्का नीला रंग भी यहाँ कुछ हद तक स्वीकार्य माना जाता है। बशर्ते वह बहुत गहरा ना हो।।

वायव्य कोण का द्वार, वायु तत्व के रंग अपनाएं।। Northwest Facing Door, Choose Air Element Colors.

मित्रों, वायव्य कोण अर्थात उत्तर-पश्चिम दिशा वायु तत्व की दिशा मानी जाती है। यहाँ द्वार होने पर सफेद, हल्का ग्रे अथवा हल्का पीला रंग उपयुक्त रहता है। यह रंग हल्केपन तथा गतिशीलता के प्रतीक होते हैं। जो वायु तत्व की प्रकृति से मेल खाते हैं। यहाँ बहुत भारी अथवा गहरे रंगों से बचना चाहिए। क्योंकि यह वायु तत्व की स्वाभाविक हल्की ऊर्जा को दबा देते हैं।।

रंग के साथ-साथ यह उपाय भी साथ अपनाएं।। Additional Remedies To Use Alongside Color.

मित्रों, अकेला रंग हर समस्या का पूर्ण समाधान नहीं होता है। पर यह एक सशक्त और सहायक अवश्य होता है। दक्षिण दिशा के द्वार पर हनुमान जी की आशीर्वाद मुद्रा वाली तस्वीर अथवा मूर्ति लगाना विशेष लाभकारी माना जाता है। मुख्य द्वार के ठीक सामने ऐसा दर्पण लगाना चाहिए। जिसमें प्रवेश करने वाले व्यक्ति का पूरा प्रतिबिंब बने, यह उपाय भी नकारात्मक ऊर्जा को वापस भेजने में सहायक होता है। नैऋत्य कोण में दोष होने पर द्वार के ऊपर पंचधातु का पिरामिड लगाना भी पारंपरिक रूप से प्रचलित उपाय बताया गया है।।

निष्कर्ष, रंग है दिशा का सबसे सरल सहयोगी।। Conclusion, Color Is Direction’s Simplest Ally.

मित्रों, तो अगली बार अगर कोई कहे कि दिशा गलत है तो अब घर तोड़ना नहीं पड़ेगा। उसे बताइए कि वास्तु शास्त्र सिर्फ तोड़-फोड़ का विज्ञान नहीं है। अपितु संतुलन का भी विज्ञान है। दक्षिण में लाल-नारंगी, नैऋत्य में पीला-भूरा, आग्नेय में हल्का गुलाबी, पश्चिम में सफेद-ग्रे और वायव्य में हल्का पीला-ग्रे, यही पांच सूत्र याद रख लीजिए। सही रंग, सही जगह पर लगाकर ही आधी लड़ाई वहीं जीती जा सकती है।।

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