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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 16 अगस्त 2026 दिन रविवार।।
मित्रों, तारीख 16 अगस्त 2026 दिन रविवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। आज वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत है। आज अपने पुत्र की कुशलता-संपन्नता-सुख एवं आरोग्य हेतु माताओं को दिनभर उपवास के उपरांत सायंकाल में श्रीगणेश जी की पूजा के बाद उगते चन्द्रमा को अर्घ्य (चन्द्र उदय:- 09:29 PM बजे) देकर उपवास खोलना चाहिए। आज सर्वार्थसिद्धियोग समस्त दिवस है। आज यायिजययोग भी है। आज अमृतसिद्धियोग भी है। आज रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत की” बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 16 अगस्त 2026 दिन रविवार।।
Aaj ka Panchang 16 August 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – सिद्धार्थ.
शक – 1948.
अयन – याम्यायनम्.
गोल – सौम्य.
ऋतु – ग्रीष्म.
मास – श्रावण.
पक्ष – शुक्ल.
गुजराती पंचांग के अनुसार – श्रावण शुक्ल पक्ष.
Panchang 16 August 2026
तिथि – चतुर्थी 16:53 PM बजे तक उपरान्त पञ्चमी तिथि है।।
नक्षत्र – उत्तराफाल्गुनी 03:26 AM तक उपरान्त हस्त नक्षत्र है।।
योग – सिद्ध 05:22 AM तक उपरान्त साध्य योग है।।
करण – वणिज 05:06 AM तक उपरान्त विष्टि 16:53 PM तक उपरान्त बव करण है।।
चन्द्रमा – कन्या राशि पर।।
सूर्य – कर्क राशि एवं आश्लेषा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:19:21
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 19:05:02
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:33:40
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 18:27:52
राहुकाल (अशुभ) – सायं 17:30 बजे से 19:06 बजे तक।।
विजय (शुभ) मुहूर्त – दोपहर 12.30 PM से 12.54 बजे तक।।
Panchang 16 August 2026
चतुर्थी तिथि विशेष:- चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी श्रीगणेश जी महाराज को बताया गया है। यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।।
इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज चतुर्थी तिथि में गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।।
मित्रों, ज्योतिष शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।
Panchang 16 August 2026
हस्त नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म हस्त नक्षत्र में हुआ है तो आप संसार को जीतने और उसपर शासन करने का पूरा पूरा सामर्थ्य एवं शक्ति रखते हैं। आपकी दृढ़ता और विचारों की स्थिरता आपको एक आम आदमी से भिन्नता और श्रेष्ठता प्रदान करती है। आप एक स्वतंत्र विजेता होंगे जो अपने ज्ञान और समृद्धि के कारण जाने जाते हैं। हस्त नक्षत्र के जातक सहृदयी और दयालु स्वभाव के होते हैं।।
जरुरतमंदों की निस्वार्थ मदद के लिए आप सदैव ही प्रशंसा पाते हैं। आप स्वभाव से थोड़े अध्यात्मिक और संगीत में रूचि रखने वाले होते हैं। आप अपने प्रियजनों के बीच रहना पसंद करते हैं। परन्तु समय-समय पर अपने कठोर निर्णयों के कारण कड़े एवं क्रूर भी हो जाते हैं। हस्त नक्षत्र के जातक अपनी अंदरूनी दृढ शक्ति के कारण बाहर से कठिन व्यक्ति प्रतीत होते हैं परन्तु वास्तविकता कुछ और ही होती है।।
अपने नम्र स्वभाव के कारण आप दूसरों को शीघ्र ही अपनी और आकर्षित कर लेते हैं। आपको जीवन में दया और मानवता के बदले में केवल आलोचना और कभी-कभी विद्रोह का भी सामना करना पड़ सकता है। आपका जीवन बहुत से उतार चढ़ाव से भरा हुआ होता है जो बहुत ही छोटे-छोटे अंतराल के बाद आकर आपकी मानसिक शांति भंग करते रहता हैं। आपका कठोर परिश्रम और कार्य के प्रति इमानदारी भी आपको स्थिरता नहीं दे पाती है।।
हस्त नक्षत्र के जातक जीवन में कभी भी बहुत अधिक धनि या बहुत अधिक निर्धन नहीं रहते हैं। यही स्तिथि उनके जीवन में सुख और दुःख को लेकर भी होता है। इसलिए आपको सदा ही संतुलित रहने का प्रयास करना चाहिए। आप कभी किसी को भूल कर भी धोखा नहीं दे सकते। क्योंकि आप इमानदारी पर विश्वास रखते हैं। यदि आपके साथ कोई विश्वासघात करता है तो आप क्रूरता और कठोरता के साथ उसका उत्तर देते हैं।।
समय के साथ ही आप अपने वास्तविक स्वभाव में आ जाते हैं और बाकि सब इश्वर पर छोड़ देते हैं। अपनी कुशाग्र बुद्धि के कारण आप किसी भी प्रकार के कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के योग्य होते हैं। आपका लक्ष्य कार्य में प्रभावी समाधान खोजना और कार्य को बिना अड़चन के पूर्ण करना होता है। आप अपने जीवन में 17-18 की आयु से ही कमाना आरम्भ कर देते हैं परन्तु अडचने 48 वर्ष की उम्र तक आपका पीछा नहीं छोड़ती।।
आप अपने जीवन में समृद्धि और सुख 48 वें वर्ष के उपरान्त ही देख पाते हैं। हस्त नक्षत्र में जन्मा जातक एक सुखी पारिवारिक जीवन व्यतीत करता है। छोटी-छोटी अडचनों के बावजूद, एक अच्छे जीवन साथी के कारण पारिवारिक जीवन संतोष पूर्वक व्यतीत होता है। सर्वगुण संपन्न पत्नी के कारण आपका दाम्पत्य जीवन सुखी एवं सद्भावनापूर्ण होता है।।
हस्त नक्षत्र में जन्मी जातिकायें कड़े स्वभाव की तथा अधिक इच्छा रखने वाली होती हैं। यह अपनी वित्तीय स्तिथि से सदा नाखुश और असंतुष्ट रहती हैं। दूसरों के धन और संपत्ति में रूचि रखना इनके स्वभाव में होता है। हस्त नक्षत्र में जन्म लेनेवाली जातिकायें कार्य करने में चतुर एवं कुशल होती हैं। हस्त नक्षत्र के जातक सदैव आभार मानने वाले होते हैं। हस्त नक्षत्र के जातकों में विटामिन बी की कमी ज्यादातर देखने को मिलती है। गैस, अपच, अजीर्ण, हाथ तथा कंधे के जोड़ों के दर्द एवं सांस की तकलीफ जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।।
प्रथम चरण:- हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी मंगल होता हैं। इस नक्षत्र चरण में पैदा हुआ जातक शूरवीर एवं तर्कशास्त्र का ज्ञाता होता है। बुध की दशा हस्त के जातक को उत्तम फल देती है। शुक्र की दशा में ऐसे जातकों का भाग्योदय होता है तथा चन्द्रमा भी उत्तम फलदायी समय लेकर आता है।।
द्वितीय चरण:- हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र होता हैं। इस नक्षत्र चरण में पैदा हुआ जातक आजीवन रोग से जूझता रहता है। जातक के शरीर में स्थायी बीमारी का योग बनता है। बुध की दशा अति उत्तम फल देती है। शुक्र की दशा में जातक का भाग्योदय होता है तथा चन्द्रमा भी उत्तम फलदायी समय लेकर आता है।।
तृतीय चरण:- हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी बुध होता हैं। इस नक्षत्र चरण में पैदा हुआ जातक धनी एवं संपन्न होता है। लग्नेश बुध की दशा अति उत्तम फल देती है। शुक्र की दशा में जातक का भाग्योदय होता है तथा चन्द्रमा भी उत्तम फलदायी समय लेकर आता है।।
चतुर्थ चरण:- हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी चन्द्र होता हैं। इस नक्षत्र चरण में पैदा हुआ जातक धनी एवं संपन्न होगा। लग्नेश बुध की दशा अति उत्तम फल देती है। शुक्र की दशा में जातक का भाग्योदय होता है तथा चन्द्रमा की दशा सामान्य फलदायी समय लेकर आता है।।
Panchang 16 August 2026
मित्रों, आज रविवार को सुबह भगवान सूर्य को ताम्बे के एक लोटे में लाल चन्दन, गुड़ और लाल फुल मिलाकर अर्घ्य इस मन्त्र से प्रदान करें। अथ मन्त्रः- एही सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते। अनुकम्प्य मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर।। अथवा गायत्री मन्त्र से भी सूर्यार्घ्य दे सकते हैं।।
इसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। भोजन में मीठा भोजन करना चाहिये नमक का परित्याग करना अत्यन्त श्रेयस्कर होता है। इस प्रकार से किया गया रविवार का पूजन आपको समाज में सर्वोच्च प्रतिष्ठा एवं अतुलनीय धन प्रदान करता है। क्योंकि सूर्य धन और प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है।।
दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।
रविवार का विशेष – रविवार के दिन तेल मर्दन करने से ज्वर (बुखार लगता) होता हैं – (मुहूर्तगणपति)।।
रविवार को क्षौरकर्म (बाल, दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से बुद्धि और धर्म की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
विशेष जानकारी – मित्रों, रविवार के दिन, चतुर्दशी एवं अमावस्या तिथियों में तथा श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास नहीं करना चाहिये। साथ ही तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना भी शास्त्रानुसार मना है अर्थात ये सब नहीं करना चाहिये।।
Panchang 16 August 2026
रविवार ध्रुव प्रकृति का दिन माना जाता है। रविवार भगवान सूर्य का दिन होता है। यह भगवान विष्णु का दिन भी माना जाता है। वैदिक सनातन धर्म में इसे सर्वश्रेष्ठ वार माना गया है। अच्छा स्वास्थ्य व तेजस्विता पाने के लिए रविवार के दिन उपवास रखना चाहिए। प्रचलन से सप्ताह का पहला वार सोमवार को माना जाता है क्योंकि रविवार को छुट्टी का नाम घोषित है। परंतु सही मायने में तो रविवार सप्ताह का प्रथम वार ही है। परंतु रविवार को कुछ ऐसे कार्य जिसे यदि आप करते हैं तो इससे आपन नुकसान उठाना पड़ सकता है।।
रविवार के दिन पश्चिम और वायव्य दिशा में यात्रा न करें। इन दिशाओं में यात्रा करना जरूरी हो तो रविवार को दलिया, घी या पान खाकर या इससे पहले पांच कदम पीछे चलकर ही इस दिशा में जाएं क्योंकि इस दिन खासकर पश्चिरम में दिशा का शूल माना जाता है। रविवार को तांबे से निर्मित चीजों को बेचने से बचना चाहिए। तांबे के अलावा सूर्य से संबंधित अन्य धातु या वस्तुएं भी ना बेचें।।
रविवार के दिन नीले, काले, कत्थई और ग्रे कलर के कपड़े नहीं पहनना चाहिए। काले या नीले से मिलते जुलते कपड़े तो कदापि ना पहनें। रविवार को नमक नहीं खाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और हर कार्य में बाधा आती है। खास कर सूर्यास्त के बाद तो नमक बिलकुल भी नहीं खाना चाहिए।।
रविवार को दिन में सहवास करना और मांस एवं मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शनि से संबंधित पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। आमतौर पर लोग रविवार को ही बाल कटाते हैं परंतु इस दिन बाल कटाने से सूर्य कमजोर होता है। इस दिन शरीर में तेल मालिश भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह सूर्य का दिन होता है और तेल शनि का होता है।।
Panchang 16 August 2026
मित्रों, रविवार सप्ताह का प्रथम दिन होता है, इसके अधिष्ठात्री देव सूर्य को माना जाता है। इस दिन जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति तेजस्वी, गर्वीले और पित्त प्रकृति के होते है। इनके स्वभाव में क्रोध और ओज भरा होता है तथा ये चतुर और गुणवान होते हैं। इस दिन जन्म लेनेवाले जातक उत्साही और दानी होते हैं तथा संघर्ष की स्थिति में भी पूरी ताकत से काम करते हैं।।
रविवार को जन्म लेनेवाले जातक सुन्दर एवं गेंहूए रंग के होते हैं। इनमें तेजस्विता का गुण स्वाभाविक ही होता है। महत्वाकांक्षी होने के साथ ही प्रत्येक कार्य में जल्दबाजी करते है और सफल भी होते हैं। उत्साह इनमें कूट-कूट कर भरा होता है तथा ये परिश्रम से कभी भी घबराते नहीं हैं। ये हर कार्य में रूचि लेने वाले होते हैं परन्तु ये लोग समय के पाबंद नहीं होते। ये जातक अपना करियर किसी भी क्षेत्र में अपने कठिन परिश्रम से बनाने की क्षमता रखते हैं। इनका शुभ दिन रविवार तथा शुभ अंक 7 होता है।।
आज का सुविचार – मित्रों, गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना। क्योंकि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती हैं। दुनिया में सिर्फ माँ-बाप ही ऐसे हैं जो बिना किसी स्वार्थ के प्यार करते हैं। कोई देख ना सका उसकी बेबसी जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों में डालकर।।
Panchang 16 August 2026
सूर्य की महादशा में मंगल विजय और बुध कुष्ठ रोग देता है।।…. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
